भारत में पुर्तगालियों का आगमन
Portuguese Arrival in India – Complete History Notes
📚 1. भारत में पुर्तगालियों का आगमन
भारत में समुद्री मार्ग से आने वाले यूरोपीय व्यापारियों में पुर्तगाली सबसे पहले थे। 15वीं शताब्दी के अंतिम चरण में यूरोपीय देशों ने भारत के साथ सीधे समुद्री व्यापार स्थापित करने के प्रयास शुरू किए। इसी क्रम में वास्को-डि-गामा 1498 ई. में भारत पहुँचा। इसके बाद पुर्तगालियों ने भारत के पश्चिमी तट पर अपने व्यापारिक और राजनीतिक प्रभाव का विस्तार किया।
⭐ पुर्तगालियों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य
2. वास्को-डि-गामा का भारत आगमन
वास्को-डि-गामा पुर्तगाली नाविक था, जिसने समुद्री मार्ग से भारत पहुँचकर यूरोप और भारत के बीच सीधे समुद्री व्यापार का मार्ग प्रशस्त किया। वह तीन बार भारत आया।
- वास्को-डि-गामा का भारत आगमन – 1498 ई.
- तीसरी यात्रा एवं गवर्नर के रूप में आगमन – 1524 ई.
- वास्को-डि-गामा की कब्र – कोचीन।
3. अल्फांसो डी अल्बुकर्क (1509–1515)
अल्फांसो डी अल्बुकर्क पुर्तगाली इतिहास का एक महत्वपूर्ण शासक एवं प्रशासक था। उसे भारत में पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। उसने भारत तथा हिंद महासागर के व्यापारिक मार्गों पर पुर्तगाली नियंत्रण मजबूत करने के लिए अनेक अभियान चलाए।
अल्बुकर्क की प्रमुख उपलब्धियाँ
- हिंद महासागर के व्यापारिक मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया।
- 1510 ई. में बीजापुर के आदिलशाही वंश से गोवा छीनकर उस पर अधिकार कर लिया।
- 1511 ई. में मलक्का पर अधिकार किया।
- 1515 ई. में फारस की खाड़ी के होर्मुज पर अधिकार किया।
- भारत में पुर्तगाली शक्ति को संगठित एवं मजबूत बनाया।
⚔️ गोवा विजय (1510 ई.)
1510 ई. में अल्बुकर्क ने बीजापुर के आदिलशाही शासकों से गोवा छीनकर उस पर अधिकार कर लिया। यह भारत में पुर्तगाली शक्ति की पहली प्रमुख राजनीतिक विजय थी। गोवा आगे चलकर पुर्तगाली शासन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना।
4. पुर्तगालियों की विवाह नीति
अल्बुकर्क ने पुर्तगालियों को भारतीय महिलाओं से विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस नीति का मुख्य उद्देश्य पुर्तगालियों को भारत में स्थायी रूप से बसाना और स्थानीय समाज के साथ उनका संबंध स्थापित करना था।
5. सती प्रथा पर प्रतिबंध का प्रयास
अल्बुकर्क को अपने अधीन क्षेत्रों में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास के लिए भी जाना जाता है। उसके शासन की नीतियों में पुर्तगाली साम्राज्य को मजबूत करना और ईसाई धर्म का विस्तार करना शामिल था।
6. मृत्यु एवं कब्र
मृत्यु – 1515 ई.
कब्र – गोवा।
मृत्यु – 1524 ई.
कब्र – कोचीन।
7. गोवा का ऐतिहासिक क्रम
गोवा पुर्तगाली शासन का प्रमुख केंद्र बना रहा। इसके इतिहास की तीन महत्वपूर्ण घटनाएँ निम्नलिखित हैं।
| वर्ष | महत्वपूर्ण घटना |
|---|---|
| 1510 | पुर्तगालियों ने गोवा पर अधिकार किया। |
| 1530 | गोवा पुर्तगाली राजधानी बना। |
| 1961 | ऑपरेशन विजय द्वारा गोवा को मुक्ति मिली। |
8. पुर्तगाली कंपनी का भारत पर प्रभाव
पुर्तगालियों के आगमन का भारत के व्यापार, कृषि, धर्म, तकनीक और वास्तुकला पर प्रभाव पड़ा। इनके प्रमुख योगदान निम्नलिखित हैं:
भारत और यूरोप के बीच नए समुद्री मार्गों की खोज एवं व्यापार को बढ़ावा मिला।
भारतीय मसालों, विशेषकर काली मिर्च को यूरोपीय बाजारों में लोकप्रियता मिली।
1556 ई. में गोवा में भारत का पहला प्रिंटिंग प्रेस स्थापित हुआ।
भारत में ईसाई धर्म के प्रसार को बढ़ावा मिला।
कई नई फसलों एवं खाद्य पदार्थों का प्रसार हुआ।
गोथिक भवन निर्माण शैली के विकास को बढ़ावा मिला।
पुर्तगालियों द्वारा प्रसारित प्रमुख फसलें एवं खाद्य पदार्थ
9. पुर्तगाली कंपनी की असफलता एवं पतन के कारण
प्रारंभिक सफलता के बाद भारत में पुर्तगाली शक्ति धीरे-धीरे कमजोर होने लगी। इसके पीछे कई राजनीतिक, धार्मिक, आर्थिक और सैन्य कारण थे।
पतन के प्रमुख कारण
- ईसाई धर्म के प्रचार पर विशेष बल देना।
- विवाह नीति तथा सती प्रथा पर प्रतिबंध जैसी सामाजिक नीतियों के कारण स्थानीय स्तर पर विरोध।
- 1560 ई. में गोवा में धर्म न्यायालय (Inquisition) की स्थापना।
- ब्रिटिश, डच और फ्रांसीसी जैसी शक्तिशाली यूरोपीय कंपनियों का भारत में प्रवेश।
- लूट-पाट की नीति अपनाना तथा हुगली में समुद्री जहाजों की लूट।
- पुर्तगाली सैन्य शक्ति का कमजोर होना।
- ब्राजील की खोज के बाद पुर्तगाल का ब्राजील की ओर अधिक ध्यान केंद्रित होना।
10. पुर्तगालियों से गोवा, दमन और दीव की मुक्ति
भारत की स्वतंत्रता के बाद भी गोवा, दमन और दीव पुर्तगाली शासन के अधीन रहे। दिसंबर 1961 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय चलाया और इन क्षेत्रों को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराया।
गोवा • दमन • दीव
11. महत्वपूर्ण तिथियाँ – एक नजर में
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1498 | वास्को-डि-गामा पहली बार भारत आया। |
| 1502 | वास्को-डि-गामा दूसरी बार भारत आया। |
| 1509 | अल्बुकर्क का कार्यकाल प्रारंभ। |
| 1510 | अल्बुकर्क ने गोवा पर अधिकार किया। |
| 1511 | मलक्का पर अधिकार। |
| 1515 | होर्मुज पर अधिकार; अल्बुकर्क की मृत्यु। |
| 1524 | वास्को-डि-गामा तीसरी बार भारत आया; मृत्यु। |
| 1530 | गोवा पुर्तगाली राजधानी बना। |
| 1556 | गोवा में पहला प्रिंटिंग प्रेस स्थापित हुआ। |
| 1560 | गोवा में धर्म न्यायालय की स्थापना। |
| 1961 | ऑपरेशन विजय द्वारा गोवा, दमन और दीव मुक्त हुए। |
12. महत्वपूर्ण MCQ अभ्यास
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निम्नलिखित प्रश्नों को हल करें। प्रत्येक प्रश्न के नीचे उत्तर दिया गया है।
(A) 1492 ई. (B) 1498 ई.
(C) 1502 ई. (D) 1510 ई.
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) 1498 ई.(A) वास्को-डि-गामा
(B) अल्फांसो डी अल्बुकर्क
(C) फ्रांसिस्को डी अल्मेडा
(D) कैब्राल
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सही उत्तर: (B) अल्फांसो डी अल्बुकर्क।(A) 1498 ई. (B) 1505 ई.
(C) 1510 ई. (D) 1515 ई.
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) 1510 ई.(A) गोवा (B) मलक्का
(C) होर्मुज (D) कोचीन
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) मलक्का।(A) होर्मुज (B) मलक्का
(C) गोवा (D) सूरत
उत्तर देखें
सही उत्तर: (A) होर्मुज।(A) 1510 ई. (B) 1524 ई.
(C) 1530 ई. (D) 1556 ई.
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) 1530 ई.(A) सूरत (B) गोवा
(C) कोचीन (D) मद्रास
उत्तर देखें
सही उत्तर: (B) गोवा। वर्ष – 1556 ई.(A) 1510 ई. (B) 1530 ई.
(C) 1556 ई. (D) 1560 ई.
उत्तर देखें
सही उत्तर: (D) 1560 ई.(A) 1509 ई. (B) 1510 ई.
(C) 1515 ई. (D) 1524 ई.
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) 1515 ई.(A) 1947 ई. (B) 1956 ई.
(C) 1961 ई. (D) 1971 ई.
उत्तर देखें
सही उत्तर: (C) 1961 ई.13. परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
- वास्को-डि-गामा की तीनों यात्राओं के वर्ष याद करें।
- अल्बुकर्क के कार्यकाल (1509–1515) और उसकी उपलब्धियों पर ध्यान दें।
- गोवा विजय, मलक्का और होर्मुज के अधिकार के वर्ष याद रखें।
- पुर्तगालियों की विवाह नीति और सती प्रथा संबंधी प्रयास को समझें।
- 1556 ई. के प्रिंटिंग प्रेस तथा 1560 ई. के धर्म न्यायालय को याद रखें।
- पुर्तगाली शासन के पतन के कारणों को बिंदुवार दोहराएँ।
- 1961 ई. के ऑपरेशन विजय से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास करें।
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